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सिर्फ UPSC जिहाद पर ही नहीं बल्कि सुरेश चव्हाणके पर भी बैन जरूरी, 1-1 शब्द नफरत से भरा है

  मीडिया का वास्तविक काम बिना किसी लाग-लपेट के लोगों तक सूचना पहुंचाना है। लेकिन पिछले कुछ वर्षो से इसके स्वरुप में व्यापक बदलाव आए हैं। सूचना के बजाय एक विचार भी लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यहां तक तो ठीक था लेकिन धीरे धीरे सुनियोजित तरीके से एक विचारधारा पर हमला हुआ। सोच को कुंद करने की कोशिश शुरु हो गई। ताज्जुब की बात ये कि इसमें भी मीडिया के तमाम संस्थान सफल रहे। रिपब्लिक भारत ने तो टीआरपी की जंग में खुद को सबसे ऊपर खड़ा कर लिया।    ताजा मामला सुदर्शन टीवी से जुड़ा है। कहने को तो ये न्यूज चैनल है लेकिन इस पर वही न्यूज चलती है जिसमें सरकार से सवाल न पूछे जाए। जनता से जुड़े सरोकार का तो कोई मतलब ही नहीं। मतलब है तो बस नफरत से। जी हां नफरत से। चैनल के प्रमुख सुरेश चव्हाणके बिंदास बोल के जरिए लोगों के सामने आए मुद्दों को लेकर आते हैं जिसे समाज की शांति और एकता पर कुठाराघात करता हो। जो मुसलमानों को कठमुल्ला कहकर संबोधित करता हो उससे भला शांति की अपील कैसे की जा सकती है?   सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के बिंदास बोल के जरिए प्रसारित होने वाले UPSC जिहाद पर रोक लगा दी।...

नोटबंदी, जीएसटी जैसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ रहे फेल, फिर मोदी सरकार के कृषि बिल पर कैसे भरोसा करे किसान?

  2014 से पहले जब नई योजनाएं लागू की जाती थी तब उसे लेकर बहुत ढिंठोरा नहीं पीटा जाता था, उसकी सफलता असफलता उस योजना के लागू होने के बाद पता चलती थी, लेकिन 2014 भारतीय इतिहास का ऐतिहासिक साल रहा, सत्ता परिवर्तन हुआ और नरेंद्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने। उसके बाद जो योजनाएं शुरु हुई वह सभी मास्टरस्ट्रोक कही गई। नोटबंदी को भाजपा ने मौद्रिक सुधार बताकर पेश किया,   जीएसटी   को कर सुधार,   तालाबंदी   को महामारी से बचाव के लिए मास्टरस्ट्रोक बताया गया, चौथा सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक   कृषि कानून   है, जिसे किसानों के लिए वरदान बताया जा रहा है।    सरकार के तमाम मास्टरस्ट्रोक सुधार के लिए ही होते हैं लेकिन सुधार किसका होता है और सुधरता कौन है ये सुधारक नहीं बताता। यहां तक कि जिसके लिए ये सुधार किए जा रहे हैं उसके प्रति भी इनकी कोई जवाबदेही नहीं होती। वह लाख विरोध करते हुए मर जाए लेकिन इनके कानों पर जू तक नहीं रेंगती। किसान एवं कॉरपोरेट की इस शिखर वार्ता में अब सरकार कहीं नहीं रही। उसने बाजार खोल दिए हैं। अब मनमर्जी चलेगी।    राज्यसभा में प...

How will online education fare in India post pandemic

The sudden lockdown due to the   Covid-19 pandemic   has thrust schools and teachers of both public and private institutions into an emergency remote teaching mode. As it becomes increasingly clear that the pandemic situation is likely to force the coming academic year to continue online, at least in some geographies, state governments and even the MHRD are looking for best practices and SOPs (standard operating procedures) for online education that can be shared with the school managements, teachers and parents. At this juncture, therefore, it is essential to review some of the recent experiences of emergency remote teaching and derive some useful lessons.   Learning from children   Experts suggest that some of the important lessons on the way forward could be learnt best from not just preparing overarching SOPs that largely are framed using a top-down approach, but by rather making the school children important stakeholders in the process. Evaluating how ...

ऑपरेशन ब्लू स्टार : पढ़िए, स्वतंत्र भारत में असैनिक संघर्ष की सबसे खूनी लड़ाई का पूरा किस्सा

ऑपरेशन ब्लू स्टार को आज 36 बरस हो गए। 1984 में पंजाब के हालात आज के कश्मीर के जैसे थे। प्रदेश में अस्थिरता पैदा करने की जोरदार कोशिश हो रही थी। पंजाब पुलिस के डीआईजी एएस अटवाल की हत्या कर दी जाती है। जालंधर के पास बंदूकधारियों ने पंजाब रोडवेज की बस रुकवाकर उसमें बैठे हिन्दुओं को चुन-चुनकर गोली मार दी। विमान हाईजैक कर लिया गया। पंजाब की स्थिति बेकाबू हो चुकी थी इसलिए केंद्र की सत्ता में बैठी इंदिरा गांधी ने वहां कि सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगा दिया।   यह भी पढ़ें:  कोरोनावायरस- एक बीमारी, हजारों मौतें, बढ़ती चिंताए, सहमे लोग   प्रदेश को अस्थिर करने वाला कोई और नहीं बल्कि पंजाब में ही जन्मा जनरैल सिंह भिंडरावाले था। भिंडरावाले कोई मामूली इंसान नहीं था। शुरुआती जीवन आम लोगो जैसा रहा। फिर राजनीति में अपने तेज तर्रार बोल के कारण पंजाब के लोगों में अपनी पहचान बना लिया। कहा जाता है कि संजय गांधी का हाथ हमेशा उसके ऊपर रहा। भिंडरावाले पंजाब में लोगों को नशा छोड़ने को लेकर जागरुक करता था फिर अचानक उसमें बदलाव हुआ और अलग "खालिस्तान" की कल्पना जाग गई। "राज करेगा खालसा...

The Tus(k)sle Between Politics and Animal Cruelty

In a gruesome incident reported from Kerala, a 15-year-old elephant died standing in water after she consumed a pineapple which was stuffed with firecrackers. The fruit exploded in her mouth and she bled to death.   This incident was reported after  Mohan Krishnan, a forest officer narrated the details of the horrific death on social media.  Krishnan wrote on Facebook, "She trusted everyone. When the pineapple she ate exploded, she must have been shocked not thinking about herself, but about the child, she was going to give birth to in 18 to 20 months."    Also Read:  MIDDLE CLASS AMID THE LOCKDOWN   "So powerful was the cracker explosion in her mouth that her tongue and mouth were badly injured. The elephant walked around in the village, in searing pain, and hunger. She was unable to eat anything because of her injuries," he added. Krishnan also informed that even during this pain she didn't harm a single human being or crush a single home.   Not...

6 बार माफीनामा लिखने वाले व अंग्रेजो से पेंशन पाने वाले सावरकर ‘वीर’ कैसे?

  "वीर दामोदर सावरकर को सम्मान देना है तो गांधी की विचारधारा की तरफ अपनी पीठ करनी होगी। और अगर गांधी को स्वीकारना है तो सावरकर की विचारधारा को नकारना होगा। दोनों को एक साथ लेकर चलना लगभग असंभव है।"   हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व को राजनीति में प्रवेश दिलाने वाले विनायक दामोदर सावरकर की आज (28 मई) जयंती है। सावरकर भारतीय आधुनिक इतिहास की ऐसी शख्सियत हैं जिनका जब भी नाम लिया जाता है विरोध के सुर अपने आप तैयार हो जाते हैं।   वर्तमान भाजपा सरकार सावरकर को लेकर जितना फिक्रमंद   रही है कांग्रेस उतना ही विरोधी। बहुत मामलों में कांग्रेस और भाजपा एक छोर पर खड़े दिख जाएंगे पर जब बात सावरकर की हो तो दोनों पार्टियों दो अलग ध्रुव पर खड़ी दिखती हैं।   यह भी पढ़ें:  मीडिया क्यों फैला रही है नफ़रत? - पार्ट-1   नासिक के भागपुर में 28 मई 1883 को जन्में सावरकर जब 7 साल के थे तो हैजे की बीमारी से इनकी मां और जब इनकी उम्र 16 साल थी तो प्लेग की महामारी से इनके पिता दामोदर पंत सावरकर की मौत हो गई। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई पर आ गई। जिन्होंने परिवार को पूरी जिम्मेदारी...

पहले तबलीगी अब प्रवासी मजदूर बना भाजपा का दुश्मन, आखिर योगी बिना दुश्मन क्यों नहीं चला सकते सरकार

  समाज में दो तरह के लोग हैं, एक वो जो अपनी हर सफलता-असफलता के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं. दूसरे वह जो अपनी सफलता के लिए तो खुद को लेकिन असफलता के लिए किसी दूसरे इंसान को दोषी बता देते हैं। देश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भी कुछ इसी तरह से है। अपनी असफल नीतियों के लिए पार्टी के तमाम नेता किसी भी हद तक चले जाते हैं। पिछले छह सालों के कार्यकाल में ये न जाने कितनी बार अपनी नाकामियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं।    मौजूदा समय में दुनिया के तमाम देशों की तरह भारत की भी स्थिति   कोरोना वायरस   से बेहद खराब है, हर दिन रिकॉर्ड मात्रा में नए केस आ रहे हैं, सरकार पर चौतरफा दबाव पड़ा रहा. स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक गर्त में चली गई है, उसे पटरी पर लाने के बजाय सरकार अभी भी जुमलेबाजी व आरोपों से काम चला रही है. देश में कोरोना संक्रमण बढ़ा तो सरकार ने इसके लिए   तबलीगी जमात   के लोगों को जिम्मेदार बता दिया.   प्रेस कॉन्फ्रेंस में बकायदा बताया जाने लगा कि कुल मरीजों में इतने मरीज तबलीगी जमात से ताल्लुक रखने वाले हैं. फैलते सं...