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Judiciary killed in encounter

एनकाउंटर में मारी गई न्यायपालिका! सुबह-सुबह एक एनकाउंटर हुआ। चार लोग मारे गए। वो चार लोग जिन्होंने एक पशु चिकित्सक का पहले बलात्कार किया और फिर उसे ज़िंदा जला दिया। इन लोगों की मौत अपराधों के मामले में ज्यादा कुछ बदलेगी- इसकी संभावनाएँ कम ही हैं। लोगों का एक बड़ा तबका इस एनकाउंटर को न्याय बता रहा है और उनमें खुशी की लहर है। हैदराबाद एनकाउंटर पर बीजेपी-कांग्रेस के एक सुर लेकिन लोगों का एक बड़ा तबका जो माने वो ठीक हो - ये ज़रूरी नहीं। एनकाउंटर हुआ तो चार बलात्कार आरोपियों का है लेकिन इस एनकाउंटर ने न्याय प्रक्रियाओं और न्याय व्यवस्था को और अधिक कमज़ोर किया है। बेहतर होता कि न्यायपालिका इन आरोपियों को त्वरित सज़ा देती। ऐसा करना न्यायपालिका के प्रति लोगों के सम्मान को बढ़ाता। हैदराबाद गैंगरेप एनकाउंटर पर बोलीं स्वाति मालीवाल एनकाउंटर न्याय नहीं हो सकता संविधान ने हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय देने की जिम्मेदारी न्यायपालिका नाम के संस्थान को दिया गया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा। वारदात के दृश्य को रिक्रिएट करने के लिए वारदात की जगह पर लेकर गई। पुलिस...

Can we have a corruption free society?

The United Nations observes December 9, as  Anti-Corruption Day . Corruption is a serious issue and no country, region is immune from it. It undermines social, economic and political progress in all societies. The results of ‘ India Corruption Survey 2019 ’, which received 1,90,000 responses from people in 248 districts, revealed that people in Delhi, Haryana, Gujarat, West Bengal, Goa, and Odisha reported low cases of corruption, while Rajasthan, Bihar, Uttar Pradesh, Telangana, Karnataka, Tamil Nadu, Jharkhand, and Punjab had higher occurrences of corruption. The survey was conducted between October 2018 and November 2019 and was conducted by ‘Local Circles’, a social media firm and the ‘Transparency International India.’ To One's surprise, according to the United Nations Development Programme, in developing countries funds lost to corruption are estimated at ten times the amount of official development assistance.  The civil society has raised this issue tim...

Constitution and Democracy! Are we really following the boundaries?

Democracy, a system which is adapted to give the power in the public’s hand by selecting their representatives amongst themselves and forming a governing body soothing their calls and needs. Opportunely, India is worldwide known as the ' Biggest Democracy ' of the world. But is it? While doubting the fact I have no questions on it being the 'Biggest ' but my thoughts are forcing me to ponder over it's functioning as a 'Democracy'. As every Democracy has its   Constitution   which gives its citizens at least the fundamental rights irrespective of their caste, creed, religion, race or gender. No matter what kind of democracy a country works on, be it presidential or parliamentary, the power is in the 'hands of the people'.  But the recent reports of 'World Press Freedom Index' ranks India at 140 amongst 180 countries, which says it all about the suppression of the voice and brings the shame to the country by maligning the image of the ...

Defecation in the tent, eating in the verandah; Story of CRPF jawans

तंबू में शौच, बरामदे में खाना; CRPF जवानों की कहानी महाराष्ट्र चुनावों  की कहानी के शुरुआती अध्याय की इतिश्री लगभग हो चुकी है। झारखंड में शुरुआत होने वाली है। चुनावों के बेहतर संचालन के लिए सीआरपीएफ के जवानों को डिप्लॉय किया गया है। उसी सीआरपीएफ के जवान जिसको आजकल की राजनीति में खूब भुनाया जाता है।  आतंकवादियों और नक्सलियों से भी कम ध्यान सुरक्षाकर्मियों के मानवाधिकार पर मुमकिन है  झारखंड चुनावों  में भी जवानों के नाम का ट्रंप कार्ड चले। लेकिन झारखंड में जवानों की वास्तविक हालत क्या है, ये जाना जा सकता है मुख्य चुनाव आयुक्त को सीआरपीएफ कमांडेंट के द्वारा भेजी गई एक शिकायत से। कमांडेंट राहुल सोलंकी ने लिखा कि जवानों के मानवाधिकार को आतंकवादियों के मानवाधिकारों से भी कम गंभीरता से लिया जाता है। राहुल सोलंकी ने चिट्ठी में आगे लिखा कि चुनावी ड्यूटी पर जिन जवानों की तैनाती हुई उनके रहने और खाने पीने का इंतज़ाम बेहद बुरा है। वो लिखते हैं कि अधिकारियों द्वारा जवानों के प्रति ऐसा रवैया उनकी गरिमा के साथ खिलवाड़ है। शिकायत के बाबत  सीआरपीएफ  के एक प्रव...

Who looted the power workers in Uttar Pradesh ??

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों को किसने लूटा ?? अगर 1 रूपया दिल्ली से निकलता है तो 15 पैसा गांव में पहुँचता है - भ्रष्टाचार किस कदर देश में फैल चुका है उसको समझाने के लिए ये शब्द थे हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के।  इस भ्रष्टाचार का एक बार फिर सबूत मिला  उत्तर प्रदेश  में । और इस बार चर्चा का कारण बने बिजली कर्मचारी। दरअसल यहाँ पर करीब 45 हजार बिजली विभाग के कर्मचारियों ने अपने पीएफ के 2268 करोड़ रुपये निजी संस्था में फंस जाने के विरोध में 18  और 19  नवंबर को अपने कार्य का बहिष्कार किया। Read more

Who is at risk from the constitution?

किसे है संविधान से ख़तरा?   चुने हुए प्रतिनिधियों को होटल की चाहरदीवारी में क़ैद करके रखे जाने का ट्रेंड लगभग स्थापित हो गया है। सरकार बनाने से पूर्व   खरीद-फ़रोख़्त  को चाणक्यगिरी कहना  नयी बुद्धिमत्ता  हो गई है। संस्थानों का सरकार के हित में प्रयोग सामान्य समझा जाने लगा है।  गवर्नर और प्रेसीडेंट की छवि पूरी तरह से कठपुतली  वाली हो गई है। दलित घोड़ी चढ़े - तो पिटाई। महिलाएँ अपनी मर्ज़ी से कपड़े पहनें - तो बवाल। विद्यार्थी शिक्षा के लिए आवाज़ उठाएँ - तो हो हल्ला। एक्टिविस्ट्स  जन सरोकार  के मुद्दों पर सरकार की आलोचना करें - तो शोर-शराबा। ये माहौल  संविधान दिवस  को अधिक प्रासंगिक बना रहा है। संविधान  का अनुच्छेद 15 कहता है कि धर्म, नस्ल, जाति, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन वर्तमान राजनीति इन आधारों के साथ-साथ और बारीक आधार निकाल रही है विभाजन के लिए-बँटवारे के लिए। बँटवारा   अपने   चरम   पर पूर्वांचली, मराठा, गुजराती - जन्मस्थान के आधार...

Democracy does not die today, the corpse has suffered a few more

लोकतंत्र आज नहीं मरी, लाश को कुछ लात और पड़े हैं   महाराष्ट्र में   देवेंद्र फडणवीस   द्वारा सीएम पद का शपथ लेने के साथ ही लोकतंत्र की हत्या के संदेश सोशल मीडिया पर तैरने लगे। असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और न जाने क्या-क्या विशेषण इस घटना को दिए जा रहे हैं। लोकतंत्र की हत्या हुई कब? लोकतंत्र की हत्या हुई । ये ख़बर अब आम हो गई है। इसलिए इस ख़बर के अन्य पहलुओं पर भी ध्यान देना ज़रूरी हो गया है। ख़बर सुनते ही मन में आना चाहिए कि हत्या हुई तो हुई पर हुई कब? अब जब सवाल उठ ही गया तो अंदर तक गोता लगाना चाहिए। और अंदर तक गोता लगाने पर पता चलेगा कि लोकतंत्र की हत्या बहुत पहले ही हो चुकी थी। ये तो बर्फ़ के बीच रखी लोकतंत्र की लाश है जिसे देख-देख हम ख़ुश होते रहते हैं।  कैसे हुई लोकतंत्र की हत्या? जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी, बिहर में राजद और जेडीयू, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा - क्या ये गठबंधन ज़िंदा लोकतंत्र में स्वीकार्य होते? एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में तोड़ देने पर विपक्ष की लगभग चुप्पी क्या ज़िंदा लोकतंत्र में स्वीकार्य होता। लाखों युवाओं की बेरोज़गारी, अर...