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श्मशान की छत गिरने में योगी सरकार नहीं तो दोषी कौन? राम मंदिर वालों का ध्यान श्मशान पर क्यों नहीं?

  यूपी के मुरादनगर में एक श्मशान घाट में कुछ लोग एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे जहां छत गिरने से करीब 24 लोगों की जान चली जाती है कई लोग घायल भी हो गए। बारिश से बचने के लिए जिस इमारत के नीचे लोग खड़े थे उसे हाल ही में बनाया गया था। हल्की गुणवत्ता के उपकरणों के इस्तेमाल से भवन इतना कमजोर था कि उसकी छत गिर गई। इस बीच एक्शन में यूपी पुलिस, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया कड़ा एक्शन, इलाके में मचा हड़कंप, यूपी के मंत्री ने व्यक्त किया दुख जैसी तमाम हैडिंग आज कल परसो तक न्यूज़ चैनलों में दौड़ती रहेंगी। पर सोचने वाली बात ये है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे? गलती किसकी है? क्या पीड़ित परिवार को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करना काफी है? या योगी जी का दुख व्यक्त करना काफी है? अगर यह घटना किसी और राज्य में हुई होती तो?   यह भी पढ़ें:  गौ रक्षा की बात करने वाले योगी के शासन में गाय के लिए पानी नहीं, प्रधान बोले- फंड दीजिए वरना छोड़ देंगे पशु   यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल लगातार उठते रहते है, विपक्ष सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा। देखा जाए तो मुरादनगर में 'करप्शन' की ही छ...

…तो क्या मोदी अब कोरोना वैक्सीन को 'भाजपा की वैक्सीन' बनाकर देश में प्रचारित करेंगे?

  कोरोना वैक्सीन आ गई है। अब लगेगी। किसे लगेगी इसी को लेकर मारामारी है। वैक्सीन महामारी पर काबू पा भी लेगी या नहीं इसपर कुछ कहना मुश्किल है लेकिन मोदी हैं तो मुमकिन है वाली चरस जब तक है कोरोना भारतीयों का घंटा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ये बात मोदी जी डंके की चोट पर बोलते हैं।   मोदीजी विश्व नेता   हैं, वो कल को बोल दें कि वैक्सीन लगवाने के बजाय पी लो तो भक्त मीडिया उसे भी जस्टिफाई कर देगी। ये उनका ट्वीट देख लो। भावी राज्यसभा सांसद रजत जी कोवैक्सीन की आलोचना करने वालों को बता रहे हैं कि   190 देशों ने इस वैक्सीन की 2 अरब डोज बुकिंग करवाई है । इसलिए गलतफहमियों का शिकार न हों.   इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च यानी   ICMR   ने कोरोना की दो वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। काहे का आपतकाल ये समझ से परे हैं। क्योंकि केस तो हर दिन तेजी से कम हो जा रहे हैं। फिलहाल छोड़िए। जिस वैक्सीन को सरकार ने मंजूरी दी है उसमें एक भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन है। हां वही कोवैक्सीन जिसका ट्रायल हरियाणा के   गृह मंत्री अनिज विज पर किया गया ...

18 महीने तक विदेशी बताकर डिटेंशन सेंटर में रखा, अब कहा- तुम बांग्लादेशी नहीं बल्कि भारतीय हो

  गुवाहाटी में रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद नूर हुसैन ने कहा- सरकारी अधिकारियों ने हम पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया, तर्क में कहा- तुम गैरकानूनी ढंग से बॉर्डर पार करके यहां आए हो, जबकि ऐसा नहीं है, हम यहीं पैदा हुए, हम असम के हैं, हम भारतीय हैं। ये बातें कहते हुए मोहम्मद नूर हुसैन के चेहरे पर संतोष के भाव थे, क्योंकि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने 34 साल के नूर हुसैन, उनकी पत्नी सहेरा बेगम और दो बच्चों को भारतीय बताया है, 18 महीने के बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर से बाहर किया गया है।    यह भी पढ़ें:  REET 2016 : एक ऐसी भर्ती जिसमें High Court के दो बार आदेश के बावजूद सरकार ने नहीं जारी की वेटिंग लिस्ट   मोहम्मद नूर हुसैन असम के उदालपुरी जिले के निवासी हैं, वह लॉडॉन्ग गांव में अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ रहते हैं, गुवाहाटी में रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते हैं, कमाई का कोई और जरिया नहीं है, बच्चे छोटे हैं इसलिए पत्नी मजदूरी करने नहीं जाती। असम में भारतीय नागरिक पहचान यानी   एनआरसी   ने काफी उथल-पुथल मचाई, देशी-विदेशी की लिस्ट बनी और करीब 19 लाख लोग विदेशी ठहरा...

REET 2016 : एक ऐसी भर्ती जिसमें High Court के दो बार आदेश के बावजूद सरकार ने नहीं जारी की वेटिंग लिस्ट

  चुनाव के वक्त बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा होता है, क्योंकि हर राजनीतिक पार्टी को पता होता है कि युवाओं के समर्थन को इस मुद्दे के साथ अपने पाले में किया जा सकता है। लेकिन चुनाव जीतते ही पार्टियां बेरोजगारी का मामला सबसे पहले भूल जाती हैं। राजस्थान प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सीधी भर्ती-2016 जिसे सरल शब्दों में   रीट भर्ती 2016   कहा जा रहा है, वह भी कुछ ऐसी है, अभ्यर्थियों को तो दिन-रात याद रहती है लेकिन सरकार भूल गई है। अभर्थियों की दुख तकलीफ उसे अभी नजर नहीं आ रही है।    ये अपने आप में एक अनोखी भर्ती है, क्यों है इसके लिए आप इसके बारे में पढ़िए। 6 जुलाई 2016 को 4940 शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया। 11 अगस्त 2017 को विज्ञप्ति को संशोधित किया गया और 25 जनवरी 2018 को पहली बार परिणाम जारी किया गया। नियम के मुताबिक पात्र अभ्यर्थियों की सूची के साथ डेढ़ गुना अभर्थियों की सूची जारी होनी चाहिए, लेकिन नहीं हुआ। बीए और रीट के नंबरों को जोड़कर मेरिट जारी कर दी गई। तमाम फर्जी लोगों ने आवेदन 100 में 100 फीसदी नंबर डालकर अप्लाई कर दिया, जिस...

न्यायिक हिरासत में रोते बिलखते अर्नब गोस्वामी Flexible लोकतंत्र का एक उदाहरण हैं

  आज हम आपको फ्लैक्सिबल लोकतंत्र बताएंगे। बताएंगे कि कैसे हैसियत देखते ही लोकतंत्र खतरे में आ जाता है। लोकतंत्र कमजोर कैसे होता है और मजबूत कैसे होते हैं इसे समझने के लिए   रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी   का मामला समझना पड़ेगा। साथ ही उनके द्वारा पिछले तीन महीने से सुशांत सुसाइड केस में आरोपी बनाई गई रिया चक्रवर्ती का मामला समझना होगा। जो कभी स्टूडियो में दहाड़ मार रहे थे वह आज जैसे ही शिकंजे में आए तुरंत बेबस लाचार बन गए।    फ्लैक्सिबल लोकतंत्र क्या है जानते हैं आप? यूपी के ललितपुर में ‘सत्ता सरकार’ अखबार के पत्रकार विनय तिवारी को भाजपा नेता के बेटो ने इसलिए पीटकर हाथ-पैर तोड़ दिए क्योंकि विनय ने उनके खिलाफ खबर लिख दी थी। इस घटना के बाद लोकतंत्र एकदम खतरे में नहीं आया। दूसरी खबर भाजपा शासित त्रिपुरा से है। यहां एक अखबार है ‘प्रतिवादी कलम’ इस अखबार ने कृषि विभाग में 150 करोड़ रुपए के घोटाले के संबंध में खबर छाप दी। सत्ताधारियों को ये बर्दाश्त नहीं हुआ। 7 नवंबर की सुबह इस अखबार को ले जा रही गाड़ी को रोका गया और 6000 प्रतियों में आग लगा दी गई। जो नह...

Impact Of Joe Biden's Win On India

  After defeating Donald Trump, it has been confirmed that Joe Biden will the next President and   Kamala Harris will be the next Vice President   of the United States. Beginning on a positive note,   PM Narendra Modi congratulated   the duo for their victory.   Now the question arises, How will Joe Biden's win impact India? Biden may be good for India but can create problems for   PM Narendra Modi . He has been disappointed by the measures that the Indian government has taken with the implementation of the   NRC   in Assam and the passage of the   CAA   into law. Biden wants India to take the necessary steps to restore the   rights of   Kashmiris . He stated that the restrictions on dissent, such as preventing peaceful protests or shutting or slowing down the internet, weakens democracy.    But, the fact that  Kamala Harris  will be the first Indian American Vice President of the United States may chan...

उच्च जाति का दबंग बंद कमरे में दलितों-आदिवासियों को प्रताड़ित करेगा तो नहीं लगेगा SC-ST एक्ट!

    देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे दलितों-आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अत्याचार बढ़ सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SC-ST जाति के लोगों के खिलाफ अगर कोई व्यक्ति घर के भीतर अपमानजनक बातें करता हो या उसे अपमानित करता हो और यह बात किसी बाहरी व्यक्ति ने न सुनी हो तो   SC-ST एक्ट   नहीं लगेगा.   यानि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि दलितों और आदिवासियों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातें तभी SC-ST एक्ट के तहत आएंगी, जब यह खुलेआम समाज में होगा और घर के लोगों के अलावा मुहल्ले के लोग भी इसे देखेंगे. सिर्फ घर के लोग और रिश्तेदार गवाह नहीं माने जाएंगे.   यह भी पढ़ें-   कहाँ गया 1.25 लाख करोड़ का पैकेज? | Bhagalpur Central University | Bihar Chunav | Bihar Ki Baat 07   लेकिन कई बार ऐसा होता है कि दलित-आदिवासी मजदूरों को बंद कमरे में प्रताड़ना दी जाती है. उन्हें कोई सवर्ण जाति का व्यक्ति घर पर बुलाकर जलील करता है. भद्दी-भद्दी गालियां देता है. ऐसे मामलों में दलित-आदिवासी जाति के लोगों को शिकायत करने के लिए गवाह भी पेश करन...