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अखिलेश यादव: जिसे मील का पत्थर समझा गया वह राजनीति के 'ब्रेकर' पर आकर बिखर गए

  आज से करीब 10 साल पहले तक सपा समर्थकों में ओबीसी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा होता था लेकिन धीरे धीरे ये वर्ग छिटकर भाजपा के पाले में चला गया। भाजपा जितनी मजबूत हुई सपा उतना कमजोर होती चली गई। आज यादव लॉबी को छोड़ दे तो सपा के साथ खड़ा होने वाला वर्ग बड़ी संख्या में नजर नहीं आता। सपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल आजम खान को योगी सरकार ने तमाम झूठे आरोपो में जेल भिजवा दिया, ऐसे में अखिलेश यादव को सड़क पर उतरना था लेकिन वह मुखरता से नहीं उतरे।    अखिलेश के भीतर ये डर था कि कहीं जनता में ये मैसेज न चला जाए कि सपा मुस्लिमों से सहानुभूति रखती है।   सीएए प्रोटेस्ट   के दौरान भी अखिलेश के दिमाग में यही चल रहा था, उस वक्त आजमगढ़ में बड़ी संख्या में   मुसलमानों को सीएए प्रोटेस्ट में तोड़फोड़   करने के आरोप में कुर्की हुई, जेल भेजा गया लेकिन अखिलेश चुप्पी साधे रहे। ध्यान रहे यहां की जनता ने अखिलेश को अपना वोट देकर सांसद चुना है। यही कारण है कि मुस्लिम भी आज सपा पर अंधा भरोसा करने से बचते नजर आ रहे हैं।    अब वर्तमान देखिए।   किसान आंदोलन   हो रहा...

जमीन बेचकर जिस बेटे को मां ने बनाया था काबिल, वही सौरभ शर्मा चंद पैसो की लालच में पाकिस्तानियों से जा मिला

  चंद पैसो की लालच में सेना संबंधी खुफिया सूचनाओं को पाकिस्तान भेजने वाले यूपी के हापुड़ जिले के पूर्व सैनिक   सौरभ शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया   है। उसके खिलाफ लखनऊ में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले का खुलासा होने के बाद मां बदहवास है उसे भरोसा ही नहीं हो रहा कि जिसे उसने अपनी जमीन बेचकर काबिल बनाया वही चंद पैसों की लालच में देश से गद्दारी करके पाकिस्तानियों से जा मिला।    यह भी पढ़ें:  यूपी की जनता हाथरस घटना भूली भी नहीं और सोनभद्र में फिर वैसे ही घटना सामने आ गई मिली जानकारी के अनुसार सौरभ शर्मा के पिता का देहांत बीस साल पहले हो गया था।  तीन बच्चो को पालने, पढ़ाने के लिए मां मधु शर्मा ने गांव के पास की ही नौ बीघा जमीन बेच दी। २०१३ में सौरभ शर्मा भारतीय सेना में शामिल हुआ तो परिवार की स्थिति सही हो गई। नौकरी लगने के करीब डेढ़ साल बाद ही सौरभ वीआरएस लेकर घर चला आया, उसने बताया कि उसकी किडनी सही नहीं है, उस समय किसी को भी ये नहीं पता था कि सौरभ इस तरह की किसी घटना में संलिप्त है। हालांकि मां को अभी भी लगता है कि उनका बेटा निर...

श्मशान की छत गिरने में योगी सरकार नहीं तो दोषी कौन? राम मंदिर वालों का ध्यान श्मशान पर क्यों नहीं?

  यूपी के मुरादनगर में एक श्मशान घाट में कुछ लोग एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे जहां छत गिरने से करीब 24 लोगों की जान चली जाती है कई लोग घायल भी हो गए। बारिश से बचने के लिए जिस इमारत के नीचे लोग खड़े थे उसे हाल ही में बनाया गया था। हल्की गुणवत्ता के उपकरणों के इस्तेमाल से भवन इतना कमजोर था कि उसकी छत गिर गई। इस बीच एक्शन में यूपी पुलिस, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया कड़ा एक्शन, इलाके में मचा हड़कंप, यूपी के मंत्री ने व्यक्त किया दुख जैसी तमाम हैडिंग आज कल परसो तक न्यूज़ चैनलों में दौड़ती रहेंगी। पर सोचने वाली बात ये है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे? गलती किसकी है? क्या पीड़ित परिवार को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करना काफी है? या योगी जी का दुख व्यक्त करना काफी है? अगर यह घटना किसी और राज्य में हुई होती तो?   यह भी पढ़ें:  गौ रक्षा की बात करने वाले योगी के शासन में गाय के लिए पानी नहीं, प्रधान बोले- फंड दीजिए वरना छोड़ देंगे पशु   यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल लगातार उठते रहते है, विपक्ष सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा। देखा जाए तो मुरादनगर में 'करप्शन' की ही छ...

…तो क्या मोदी अब कोरोना वैक्सीन को 'भाजपा की वैक्सीन' बनाकर देश में प्रचारित करेंगे?

  कोरोना वैक्सीन आ गई है। अब लगेगी। किसे लगेगी इसी को लेकर मारामारी है। वैक्सीन महामारी पर काबू पा भी लेगी या नहीं इसपर कुछ कहना मुश्किल है लेकिन मोदी हैं तो मुमकिन है वाली चरस जब तक है कोरोना भारतीयों का घंटा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ये बात मोदी जी डंके की चोट पर बोलते हैं।   मोदीजी विश्व नेता   हैं, वो कल को बोल दें कि वैक्सीन लगवाने के बजाय पी लो तो भक्त मीडिया उसे भी जस्टिफाई कर देगी। ये उनका ट्वीट देख लो। भावी राज्यसभा सांसद रजत जी कोवैक्सीन की आलोचना करने वालों को बता रहे हैं कि   190 देशों ने इस वैक्सीन की 2 अरब डोज बुकिंग करवाई है । इसलिए गलतफहमियों का शिकार न हों.   इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च यानी   ICMR   ने कोरोना की दो वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। काहे का आपतकाल ये समझ से परे हैं। क्योंकि केस तो हर दिन तेजी से कम हो जा रहे हैं। फिलहाल छोड़िए। जिस वैक्सीन को सरकार ने मंजूरी दी है उसमें एक भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन है। हां वही कोवैक्सीन जिसका ट्रायल हरियाणा के   गृह मंत्री अनिज विज पर किया गया ...

18 महीने तक विदेशी बताकर डिटेंशन सेंटर में रखा, अब कहा- तुम बांग्लादेशी नहीं बल्कि भारतीय हो

  गुवाहाटी में रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद नूर हुसैन ने कहा- सरकारी अधिकारियों ने हम पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया, तर्क में कहा- तुम गैरकानूनी ढंग से बॉर्डर पार करके यहां आए हो, जबकि ऐसा नहीं है, हम यहीं पैदा हुए, हम असम के हैं, हम भारतीय हैं। ये बातें कहते हुए मोहम्मद नूर हुसैन के चेहरे पर संतोष के भाव थे, क्योंकि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने 34 साल के नूर हुसैन, उनकी पत्नी सहेरा बेगम और दो बच्चों को भारतीय बताया है, 18 महीने के बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर से बाहर किया गया है।    यह भी पढ़ें:  REET 2016 : एक ऐसी भर्ती जिसमें High Court के दो बार आदेश के बावजूद सरकार ने नहीं जारी की वेटिंग लिस्ट   मोहम्मद नूर हुसैन असम के उदालपुरी जिले के निवासी हैं, वह लॉडॉन्ग गांव में अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ रहते हैं, गुवाहाटी में रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते हैं, कमाई का कोई और जरिया नहीं है, बच्चे छोटे हैं इसलिए पत्नी मजदूरी करने नहीं जाती। असम में भारतीय नागरिक पहचान यानी   एनआरसी   ने काफी उथल-पुथल मचाई, देशी-विदेशी की लिस्ट बनी और करीब 19 लाख लोग विदेशी ठहरा...

REET 2016 : एक ऐसी भर्ती जिसमें High Court के दो बार आदेश के बावजूद सरकार ने नहीं जारी की वेटिंग लिस्ट

  चुनाव के वक्त बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा होता है, क्योंकि हर राजनीतिक पार्टी को पता होता है कि युवाओं के समर्थन को इस मुद्दे के साथ अपने पाले में किया जा सकता है। लेकिन चुनाव जीतते ही पार्टियां बेरोजगारी का मामला सबसे पहले भूल जाती हैं। राजस्थान प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सीधी भर्ती-2016 जिसे सरल शब्दों में   रीट भर्ती 2016   कहा जा रहा है, वह भी कुछ ऐसी है, अभ्यर्थियों को तो दिन-रात याद रहती है लेकिन सरकार भूल गई है। अभर्थियों की दुख तकलीफ उसे अभी नजर नहीं आ रही है।    ये अपने आप में एक अनोखी भर्ती है, क्यों है इसके लिए आप इसके बारे में पढ़िए। 6 जुलाई 2016 को 4940 शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया। 11 अगस्त 2017 को विज्ञप्ति को संशोधित किया गया और 25 जनवरी 2018 को पहली बार परिणाम जारी किया गया। नियम के मुताबिक पात्र अभ्यर्थियों की सूची के साथ डेढ़ गुना अभर्थियों की सूची जारी होनी चाहिए, लेकिन नहीं हुआ। बीए और रीट के नंबरों को जोड़कर मेरिट जारी कर दी गई। तमाम फर्जी लोगों ने आवेदन 100 में 100 फीसदी नंबर डालकर अप्लाई कर दिया, जिस...

न्यायिक हिरासत में रोते बिलखते अर्नब गोस्वामी Flexible लोकतंत्र का एक उदाहरण हैं

  आज हम आपको फ्लैक्सिबल लोकतंत्र बताएंगे। बताएंगे कि कैसे हैसियत देखते ही लोकतंत्र खतरे में आ जाता है। लोकतंत्र कमजोर कैसे होता है और मजबूत कैसे होते हैं इसे समझने के लिए   रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी   का मामला समझना पड़ेगा। साथ ही उनके द्वारा पिछले तीन महीने से सुशांत सुसाइड केस में आरोपी बनाई गई रिया चक्रवर्ती का मामला समझना होगा। जो कभी स्टूडियो में दहाड़ मार रहे थे वह आज जैसे ही शिकंजे में आए तुरंत बेबस लाचार बन गए।    फ्लैक्सिबल लोकतंत्र क्या है जानते हैं आप? यूपी के ललितपुर में ‘सत्ता सरकार’ अखबार के पत्रकार विनय तिवारी को भाजपा नेता के बेटो ने इसलिए पीटकर हाथ-पैर तोड़ दिए क्योंकि विनय ने उनके खिलाफ खबर लिख दी थी। इस घटना के बाद लोकतंत्र एकदम खतरे में नहीं आया। दूसरी खबर भाजपा शासित त्रिपुरा से है। यहां एक अखबार है ‘प्रतिवादी कलम’ इस अखबार ने कृषि विभाग में 150 करोड़ रुपए के घोटाले के संबंध में खबर छाप दी। सत्ताधारियों को ये बर्दाश्त नहीं हुआ। 7 नवंबर की सुबह इस अखबार को ले जा रही गाड़ी को रोका गया और 6000 प्रतियों में आग लगा दी गई। जो नह...