Skip to main content

Posts

मीडिया क्यों फैला रही है नफ़रत? - पार्ट-1

Author :-   Neeraj Jha पूरा विश्व नाज़ुक वक्त से गुज़र रहा है। लेकिन भारतीय मीडिया का एक बड़ा तबका अभ भी सांप्रदायिक उन्माद फैलाने में लगा हुआ है। फ़र्ज़ी वीडियो और झूठी ख़बरें प्रकाशित कर एक  खास तरह का नैरेटिव सेट किया जाता है। इस नैरेटिव से समाज का ताना-बाना बुरी तरह से खराब हो रहा है। आखिर क्यों मीडिया का एक बड़ा तबका समाज के खिलाफ खलनायक की तरह एक्ट कर रहै है? - इस मुद्दे पर हमने बातचीत की सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया से। वीडियो देखें -   https://youtu.be/bVKEV2379Y0 बातचीत के अंश - प्रश्न - एक ऐसे समय में जब देश महामारी से लड़ रहा है, आखिर क्यों गोदी मीडिया सांप्रदायिक नफ़रत फैला रही है?  उत्तर -   जब चौकीदार सो जाता है तब वह सारी जिम्मेदारी कुत्तों को दे जाता है। मीडिया का एक बड़ा तबका कुत्तों की भूमिका में आ चुका है। जब चौकीदार सो रहा है, चोर लोग आकर देश को लूट रहे हैं, बेईमान लोग देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं तो मीडिया को काम दिया गया है कि लोगों को निरंतर गुमराह करके मूलभूत सुविधाओं पर सवाल पूछना शिक्षा और स्वास्थ...

गरीबों से पैसे वसूलने का गुजरात मॉडल, गैर-कानूनी तरीके से हो रही रेल टिकटों की होम डिलीवरी

Author :-   Satyam Pandey 'ग्राम प्रधान ने लाकर हम सबको टिकट दिया, हमें स्टेशन पर कोई टिकट नहीं मिला, प्रधान ने हमें टिकट दिए और सारे पैसे लिए' रेलवे टिकट दिखाते हुए गुजरात के वडोदरा से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के महखरा गांव में लौटे एक श्रमिक मज़दूर ने बताया। प्रवासी श्रमिक के इस बयान ने सरकारी दावों और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। किराया वसूलने का नया तरीका- ब्लैक में हो रही टिकटों की होम डिलीवरी  लॉक डाउन के तीसरे चरण में श्रमिक मज़दूरों को लाने का सिलसिला जारी है, लेकिन रेल टिकट के नाम पर छिड़ी बहस पर आए दिन नए नए खुलासे हो रहे हैं जो सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं। प्रवासी मज़दूरों के लिए चलाए जा रहे श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में इन लोगों से बढ़ा हुआ किराया वसूला जा रहा है। बढ़े हुए किराए का साक्ष्य कभी दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन से मिलता है, तो कभी लखनऊ, बाराबंकी, गोरखपुर जैसे तमाम स्टेशनों से मिलता है।  गुजरात के वडोदरा से यूपी क...

लॉकडाउन : प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने को लेकर इतना बेबस क्यों हैं सुशासन बाबू?

सोशल मीडिया पर सूरत का एक वीडियो देखा, जिसमें बिहार के कुछ मजदूर एक जगह इकट्ठा हैं उसमें एक मजदूर घर वापसी को लेकर बिहार सरकार से अपील करता है, पहले वह अपने खाने, रहने और नौकरी के जाने की बात करता है फिर वह सीएम नीतीश कुमार को गाली देता है, गाली देते वक्त पर यही कहता है कि जब सारे राज्यों की सरकारें अपने लोगों को वापस बुला रही है तो नीतीश कुमार क्यों नहीं बुला रहे। इसके बाद वह लगातार गालियां देता है, बाद में नाम और मोबाइल नंबर भी बताता है।    यह भी पढ़ें:  कोरोनावायरस- एक बीमारी, हजारों मौतें, बढ़ती चिंताए, सहमे लोग   महज एक वीडियो ही नहीं ऐसे तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर भरे पड़े हैं जिसमें बिहार के मजदूर सरकार से घर पहुंचाने की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार इन्हें जहां है वहीं रहने को कहते हुए एक हजार रुपए की नाकाफी मदद की बात कहती है। चुनावी वर्ष होने के बावजूद भी सरकार आखिर अपने लोगों के लिए आगे आकर क्यों मदद नहीं कर पा रही है, इसे लेकर अनेक तर्क दिए जा रहे हैं।    स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महामारी का डर  बिहार की पृष्ठभूमि से आने वाले नीरज झा कहत...

कोरोना महामारी के दौरान भी जारी है एक्टिवस्ट्स को दबाने की मुहिम!

देश कोरोना से जंग लड़ रहा है और दिल्ली पुलिस दलविशेष के राजनैतिक पूर्वाग्रहों के कारण दुश्मन माने जा चुके लोगों के खिलाफ जंग को एक नए आयाम तक पहुँचा रही है। मीरान हैदर, सफूरा ज़रगार, गौहर गिलानी, मसरत जहाँ, उमर ख़ालिद, ख़ालिद सैफ़ी, साबु अंसारी आदि - ये वो नाम हैं जिन्हें एंटी-टेरर लॉ के के तहत या तो गिरफ्तार किया गया है या नामज़द। यह भी पढ़ें:  कोरोनावायरस- एक बीमारी, हजारों मौतें, बढ़ती चिंताए, सहमे लोग गौहर गिलानी और मसरत जहाँ कश्मीरी जर्नलिस्ट्स हैं। उन पर   UAPA   का कारण उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स हैं। बाकियों पर दिल्ली में दंगा भड़काने का आरोप है। इसके अलावा भी कई आरोप लगे हैं। एक बात समझने लायक है दिल्ली दंगों के आरोप में UAPA झेल रहे ये एक्टिविस्ट्स   एंटी-सीएए आंदोलनों   में मुख्य रूप से मुखर रहे। 14 दिसंबर से शुरू हुआ आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्वक रहा। देश में कई सारे रेप्लिका तैयार हुए। पूरा देश इन आंदोलनों के रंग में रंग गया। यह भी पढ़ें:  ‘ मस्जिदियाबिंद’ से ग्रसित रजत शर्मा को मजूदरों की रोटी नहीं उनके हाथ में बैग की फिक्र कै...

THREAT OF FUTURE MARGINALISATION OF MUSLIMS IN INDIA

Several instances of religious discrimination and further marginalization of the Muslims have come to notice in this   coronavirus pandemic . Vegetable vendors are being asked to show their religious identity, demanding their Aadhaar cards, those who are found to be Muslims are not allowed to do business in Hindu areas. Strangely, Muslim women are being refused groceries because of their religion. Not only in private domains, but this discrimination is happening in government domains too.   Also Read:  MIDDLE CLASS AMID THE LOCKDOWN   A pregnant Muslim woman was refused to be admitted to the government hospital, which leads to the delivery of a baby in the ambulance itself which further lead to the baby's death. Another govt hospital has been accused of separating the wards based on religion for treating COVID 19 patients. In some places, workers are being thrashed because of their religion.   Also read:  How The World Will Emerge After The Pandemic ...

कोरोना महामारी और दो हिस्सों में बंटा समाज

हम सब महामारी के दौर से गुजर रहे है। लेकिन हमारे सामने इसके अलावा भी कई चुनौतियां और सवाल हैं। मसलन - महामारी के बाद क्या होगा? जो लोग बच जायेंगे उनका भविष्य कैसा होगा? उनकी स्थिति कैसे होगी?   इस महामारी ने अर्थव्यवस्था को चौपट करने के साथ ही दो हिस्सों में बँटे समाज को स्पष्ट रेखांकित किया है.   एक तरफ वो लोग है जिनके पास अपार संपत्ति है तो दूसरी तरफ वो हैं, जो एक-एक दाने को मोहताज है. एक तरफ पूँजीपतिओं की बड़ी डील है तो दूसरी तरफ पलायन को मजबूर मजदूरों की व्यथा। इस महामारी के बीच भी पूँजीपतियों की सत्ता वैसी की वैसी कायम है. इस महामारी से लड़ने के क्या उपाय है हमारे पास? अर्थव्यस्था लगभग चौपट होने की कगार पर है।  घनी आबादी वाले देश भारत के लिए भुखमरी पहले से एक बडी समस्या रही है. महामारी ने इस समस्या को दोगुना कर दिया हैं। जितने भी मजदूर है उनका काम ठप्प हो जाने के बाद उनके पास दो वक़्त की रोटी नहीं है। उन्हें   खाना खिलाने   के लिए तरह तरह की सरकारी योजनाओ का ऐलान हो रहा है लेकिन क्या वाकई ये सब हो रहा है. इसका जवाब तो इस लॉकडाउन के अंत में पता चलेग...

A quick tour of the Coronavirus Aftermath

Well look here. "They" have not "imprisoned us forever", like some feared. Now they want us soon to go back to work so we can start rebuilding the bruised economies.   I suspect 5G will be around for a long time and if that was responsible for all this, then we will get no respite. We will continue dying from it until we leave our place to other animals that are not affected by it. Als, the virus has devoured populations which probably even haven’t heard about the   5G   yet, but are struggling to stay alive. Also Read:  All About Aarogya Setu Bill Gates apparently made a bid mistake in predicting a pandemic beforehand, which led to theories of him administering this epidemic. Bill Gates has not come up with a vaccine yet and chances are others will beat him to it; so if he was behind the   Covid-19 virus , he was bad at math not to have had it ready and waiting before he triggered this off. The "globalists" have not achieved "one-...