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पहले तबलीगी अब प्रवासी मजदूर बना भाजपा का दुश्मन, आखिर योगी बिना दुश्मन क्यों नहीं चला सकते सरकार

  समाज में दो तरह के लोग हैं, एक वो जो अपनी हर सफलता-असफलता के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं. दूसरे वह जो अपनी सफलता के लिए तो खुद को लेकिन असफलता के लिए किसी दूसरे इंसान को दोषी बता देते हैं। देश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भी कुछ इसी तरह से है। अपनी असफल नीतियों के लिए पार्टी के तमाम नेता किसी भी हद तक चले जाते हैं। पिछले छह सालों के कार्यकाल में ये न जाने कितनी बार अपनी नाकामियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं।    मौजूदा समय में दुनिया के तमाम देशों की तरह भारत की भी स्थिति   कोरोना वायरस   से बेहद खराब है, हर दिन रिकॉर्ड मात्रा में नए केस आ रहे हैं, सरकार पर चौतरफा दबाव पड़ा रहा. स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक गर्त में चली गई है, उसे पटरी पर लाने के बजाय सरकार अभी भी जुमलेबाजी व आरोपों से काम चला रही है. देश में कोरोना संक्रमण बढ़ा तो सरकार ने इसके लिए   तबलीगी जमात   के लोगों को जिम्मेदार बता दिया.   प्रेस कॉन्फ्रेंस में बकायदा बताया जाने लगा कि कुल मरीजों में इतने मरीज तबलीगी जमात से ताल्लुक रखने वाले हैं. फैलते सं...

गुजरात मॉडल: मैं इस देश के लोगों को बेचा गया सबसे बड़ा झूठ हूँ!

गुजरात मॉडल - ये वो प्रोडक्ट है, जिसपर PhD होनी चाहिए। गुजरात मॉडल का पैकेट हवा से भरा हुआ था। लेकिन बिका खूब। इतना कि पूरे देश को इस मॉडल के रंग में रंगे जाने की बात होने लगी। और इस मॉडल के पेंटर बाबू यानी कि नरेंद्र मोदी को देश की जिम्मेदारी सौंप दी गई।   गुजरात मॉडल की पोल-खोल हालाँकि 2014 के बाद से ही   गुजरात मॉडल   की पोल खुलने लगी। खासतौर पर शुरुआती सालों में आम आदमी पार्टी गुजरात मॉडल के खिलाफ बड़ी ताकत से खड़ी रही। अरविंद केजरीवाल खुद गुजरात गए और वहाँ की सड़कों, सफाई व्यवस्था को लेकर गुजरात मॉडल की आलोचना की।   लोगों को बेचा गया सबसे बड़ा झूठ अब   गुजरात मॉडल खुद चीख-चीख कर बता रहा   है कि मैं इस देश के लोगों को बेचा गया सबसे बड़ा झूठ हूँ। ज्यादा पीछे नहीं जाते हैं। शुरू करते हैं फरवरी से। कोरोना का वायरस दस्तक दे चुका था। और पीएम मोदी एक नए परसेप्शन को क्रिएट करने के लिए   नमस्ते ट्रंप   का आयोजन करवा रहे थे। अहमदाबाद क्रिकेट स्टेडियम में भव्य आयोजन होना था। और इस आयोजन से पहले गुजरात मॉडल को ढ़कने के लिए अहमदाबाद में सड़कों पर 4 फुट ऊँ...

जी न्यूज के सुधीर चौधरी के 28 सहकर्मी मिले कोरोना संक्रमित, लोग प्रार्थना के बजाय ट्रोल क्यों कर रहे?

देश की बड़ी मीडिया कंपनी जी न्यूज इन दिनों चर्चा में है, चर्चा में रहने का कारण कोरोना संक्रमण है, जी न्यूज कोरोना की कवरेज को लेकर नहीं बल्कि इस महामारी से संक्रमित होने को लेकर चर्चा में है। 15 मई को जी न्यूज में काम करने वाले एक कर्मचारी में कोरोना की पुष्टि हुई जिसके बाद बाकी और लोगों की जांच हुई तो 28 लोग इस महामारी से ग्रसित मिले।    कोरोना के तमाम मामलों के बीच जी मीडिया में मिले केस को भी एक सामान्य घटना की तरह लेना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ, सोशल मीडिया पर जी न्यूज का मजाक उड़ाया जाने लगा। ‘जानवरों को हुआ कोरोना’, ‘जी जमाती’ जैसे तमाम शब्द प्रयोग किए जाने लगे, ऐसा नहीं कि सबने ऐसा किया। तमाम ऐसे भी लोग हैं जिन्होने जी के संक्रमित कर्मचारियों के जल्द स्वास्थ्य होने की कामना की, एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी पत्रकारों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए जल्द स्वस्थ होने की कामना की.   यह भी पढ़ें:  मीडिया क्यों फैला रही है नफ़रत? - पार्ट-1   कोरोना संकट   के बीच भी जी न्यूज के ट्रोल होने के पीछे उसका ही कृत्य है,   निजामुद्दीन में तबलीगी...

मीडिया क्यों फैला रही है नफ़रत? - पार्ट-1

Author :-   Neeraj Jha पूरा विश्व नाज़ुक वक्त से गुज़र रहा है। लेकिन भारतीय मीडिया का एक बड़ा तबका अभ भी सांप्रदायिक उन्माद फैलाने में लगा हुआ है। फ़र्ज़ी वीडियो और झूठी ख़बरें प्रकाशित कर एक  खास तरह का नैरेटिव सेट किया जाता है। इस नैरेटिव से समाज का ताना-बाना बुरी तरह से खराब हो रहा है। आखिर क्यों मीडिया का एक बड़ा तबका समाज के खिलाफ खलनायक की तरह एक्ट कर रहै है? - इस मुद्दे पर हमने बातचीत की सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया से। वीडियो देखें -   https://youtu.be/bVKEV2379Y0 बातचीत के अंश - प्रश्न - एक ऐसे समय में जब देश महामारी से लड़ रहा है, आखिर क्यों गोदी मीडिया सांप्रदायिक नफ़रत फैला रही है?  उत्तर -   जब चौकीदार सो जाता है तब वह सारी जिम्मेदारी कुत्तों को दे जाता है। मीडिया का एक बड़ा तबका कुत्तों की भूमिका में आ चुका है। जब चौकीदार सो रहा है, चोर लोग आकर देश को लूट रहे हैं, बेईमान लोग देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं तो मीडिया को काम दिया गया है कि लोगों को निरंतर गुमराह करके मूलभूत सुविधाओं पर सवाल पूछना शिक्षा और स्वास्थ...

गरीबों से पैसे वसूलने का गुजरात मॉडल, गैर-कानूनी तरीके से हो रही रेल टिकटों की होम डिलीवरी

Author :-   Satyam Pandey 'ग्राम प्रधान ने लाकर हम सबको टिकट दिया, हमें स्टेशन पर कोई टिकट नहीं मिला, प्रधान ने हमें टिकट दिए और सारे पैसे लिए' रेलवे टिकट दिखाते हुए गुजरात के वडोदरा से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के महखरा गांव में लौटे एक श्रमिक मज़दूर ने बताया। प्रवासी श्रमिक के इस बयान ने सरकारी दावों और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। किराया वसूलने का नया तरीका- ब्लैक में हो रही टिकटों की होम डिलीवरी  लॉक डाउन के तीसरे चरण में श्रमिक मज़दूरों को लाने का सिलसिला जारी है, लेकिन रेल टिकट के नाम पर छिड़ी बहस पर आए दिन नए नए खुलासे हो रहे हैं जो सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं। प्रवासी मज़दूरों के लिए चलाए जा रहे श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में इन लोगों से बढ़ा हुआ किराया वसूला जा रहा है। बढ़े हुए किराए का साक्ष्य कभी दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन से मिलता है, तो कभी लखनऊ, बाराबंकी, गोरखपुर जैसे तमाम स्टेशनों से मिलता है।  गुजरात के वडोदरा से यूपी क...

लॉकडाउन : प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने को लेकर इतना बेबस क्यों हैं सुशासन बाबू?

सोशल मीडिया पर सूरत का एक वीडियो देखा, जिसमें बिहार के कुछ मजदूर एक जगह इकट्ठा हैं उसमें एक मजदूर घर वापसी को लेकर बिहार सरकार से अपील करता है, पहले वह अपने खाने, रहने और नौकरी के जाने की बात करता है फिर वह सीएम नीतीश कुमार को गाली देता है, गाली देते वक्त पर यही कहता है कि जब सारे राज्यों की सरकारें अपने लोगों को वापस बुला रही है तो नीतीश कुमार क्यों नहीं बुला रहे। इसके बाद वह लगातार गालियां देता है, बाद में नाम और मोबाइल नंबर भी बताता है।    यह भी पढ़ें:  कोरोनावायरस- एक बीमारी, हजारों मौतें, बढ़ती चिंताए, सहमे लोग   महज एक वीडियो ही नहीं ऐसे तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर भरे पड़े हैं जिसमें बिहार के मजदूर सरकार से घर पहुंचाने की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार इन्हें जहां है वहीं रहने को कहते हुए एक हजार रुपए की नाकाफी मदद की बात कहती है। चुनावी वर्ष होने के बावजूद भी सरकार आखिर अपने लोगों के लिए आगे आकर क्यों मदद नहीं कर पा रही है, इसे लेकर अनेक तर्क दिए जा रहे हैं।    स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महामारी का डर  बिहार की पृष्ठभूमि से आने वाले नीरज झा कहत...

कोरोना महामारी के दौरान भी जारी है एक्टिवस्ट्स को दबाने की मुहिम!

देश कोरोना से जंग लड़ रहा है और दिल्ली पुलिस दलविशेष के राजनैतिक पूर्वाग्रहों के कारण दुश्मन माने जा चुके लोगों के खिलाफ जंग को एक नए आयाम तक पहुँचा रही है। मीरान हैदर, सफूरा ज़रगार, गौहर गिलानी, मसरत जहाँ, उमर ख़ालिद, ख़ालिद सैफ़ी, साबु अंसारी आदि - ये वो नाम हैं जिन्हें एंटी-टेरर लॉ के के तहत या तो गिरफ्तार किया गया है या नामज़द। यह भी पढ़ें:  कोरोनावायरस- एक बीमारी, हजारों मौतें, बढ़ती चिंताए, सहमे लोग गौहर गिलानी और मसरत जहाँ कश्मीरी जर्नलिस्ट्स हैं। उन पर   UAPA   का कारण उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स हैं। बाकियों पर दिल्ली में दंगा भड़काने का आरोप है। इसके अलावा भी कई आरोप लगे हैं। एक बात समझने लायक है दिल्ली दंगों के आरोप में UAPA झेल रहे ये एक्टिविस्ट्स   एंटी-सीएए आंदोलनों   में मुख्य रूप से मुखर रहे। 14 दिसंबर से शुरू हुआ आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्वक रहा। देश में कई सारे रेप्लिका तैयार हुए। पूरा देश इन आंदोलनों के रंग में रंग गया। यह भी पढ़ें:  ‘ मस्जिदियाबिंद’ से ग्रसित रजत शर्मा को मजूदरों की रोटी नहीं उनके हाथ में बैग की फिक्र कै...