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पिछड़ गए अमित शाह, ममता रेस में मीलों आगे! - बंगाल चुनाव ओपीनियन पोल

  किसी भी खेल को जीतने की संभावनाएँ तब बढ़ जातीं हैं, जब या तो नियम आपने ही बनाएँ हों या आप उन्हें अच्छे से जानते हों। पश्चिम बंगाल चुनाव भी एक मज़ेदार खेल बनता जा रहा है। बीजेपी ने अपने नियम इस खेल में सेट करने की कोशिश की, जैसे -   सीएए ,   एनआरसी ,   एनपीआर   और बांग्लादेशी घुसपैठिए। लेकिन फ़िलहाल ऐसा लग रहा है कि वो नियम सेट हो नहीं पाए।   “ कौन जीतेगा पश्चिम बंगाल के चुनाव ” - ये आम लोगों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। इस खेल में जो दो दल सबसे आगे दिख रहे हैं वो हैं - सत्तारूढ़ टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी। चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर में अमित शाह ने कहा था कि उनकी पार्टी आने वाले चुनावों में 200 से अधिक सीटें हासिल करेगी। वहीं ममता बनर्जी पिछले दो बार के विस चुनावों के प्रदर्शन से बेहतर परिणाम को लेकर आश्वस्त दिख रहीं थीं। मतलब 294 सीटों वाली विधानसभा में दोनों ही नेता अपनी-अपनी पार्टी की सरकार बनने को लेकर आश्वस्त थे।   फिलहाल   ABP के C Voter   ने सर्वे कर लोगों के मूड का जायज़ा लिया। अगर आज चुनाव होते हैं तो संभावित परिणा...

"After farmers and youths, now bankers are on roads" - Why?

  The bankers, holding posters and shouting slogans have created an uproar on the Indian streets after the   United Forum of Bank Union   (UFBU), an umbrella body of nine bank unions, called for a two-day nationwide strike on March 15th and 16th. The minds were filled with furor until the strike. All this started on February 24th after Finance Minister Nirmala Sitharaman's tweet. She tweeted, "Embargo lifted on a grant of Govt business to private banks.  All banks can now participate. Private banks can now be equal partners in the development of the Indian economy, furthering Govt's social sector initiatives, and enhancing customer convenience." Soon after that, the Bank of Maharashtra, Bank of India, Indian Overseas Bank, and the Central Bank of India were shortlisted for privatization. Earlier, only two banks were said to be privatized but when announced, there were four which was a shocker, leading to objections.   Due to the bank strike, major services like ...

जिन्होंने बैंक से फ्रॉड किया अब उन्हीं को बैंक क्यों सौंपना चाहती है मोदी सरकार?

जिन्होंने बैंक से फ्रॉड किया अब उन्हीं को बैंक क्यों सौंपना चाहती है मोदी सरकार? साल 1969, केंद्र की सत्ता में थी इंदिरा गांधी. उन्होंने एक झटके में 14 बैंको का राष्ट्रीयकरण यानी सरकारी कर दिया। इंदिरा गांधी ने कहा- बैंक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं वह अपने मालिकों के हाथ की कठपुतली बनकर रह गए हैं। वक्त बीता और साल आया 2021, केंद्र की सत्ता में हैं नरेंद्र मोदी। उन्होंने कहा- सरकार का काम व्यापार करना नहीं है। और उन्होंने बैंको को निजी हाथों में सौंप दिया। दो सरकार। दो फैसले। किसके सही और किसके गलत ये आप तय करें। पिछले चार सालों में मोदी सरकार ने 14 बैंको को दूसरे बैंको में समाहित यानी विलय कर दिया। अब उनके निशाने पर आईडीबीआई समेत 2 अन्य सरकारी बैंक हैं जिसे वह निजी हाथों में सौंपने जा रही है। देश के सबसे बड़े बैंक कर्मचारी संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस ने इसके विरोध में 15 और 16 मार्च को हड़ताल का ऐलान किया है। बैंक कर्मियों का कहना है कि ऐसे वक्त में जब सरकारी बैंको को मजबूत करके अर्थव्यवस्था को गति देने की जरूरत है उस वक्त उन्हें बेचा जा रहा है। सवाल है कि इन आईड...

Entrance Exam में भी GST लगाकर गरीबों को उच्च शिक्षा से दूर कर रही मोदी सरकार?

  क्या भारत बिना शिक्षा के विश्व गुरु बन सकता है? अगर ऐसा नहीं तो फिर उच्च शिक्षा को हर दिन महंगा क्यों किया जा रहा है? ये जानते हुए कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा हासिल करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। क्या इससे ये मान लिया जाए कि सरकार मान चुकी है कि हम वाट्सऐप यूनिवर्सिटी के जरिए ही लोगों को शिक्षित कर देंगे। ताजा उदाहरण नीट-पीजी की परीक्षा का है।    यह भी पढ़ें:  SSC GD - 2018 Protests - लाठीचार्ज में टूटा हाथ, अभ्यर्थी ने कहा - हाथ टूटा है, हौसला नहीं     नीट का एंट्रेंस टेस्ट नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन यानी एनबीई करवाता है। पिछले साल जिन छात्रों ने इसका टेस्ट दिया उन्हें फार्म के लिए 3750 रुपए देने पड़े थे। इस बार जो छात्र इस टेस्ट में बैठना चाहते हैं उन्हें उसी परीक्षा के लिए 4250 रुपए देने पड़ेंगे। सिर्फ यही नहीं बल्कि इसबार जीएसटी लगा दिया गया है। इस टेस्ट में शामिल होने वाले छात्रों को जीएसटी भी चुकाना होगा। यानी समान्य और पिछड़े वर्ग के छात्र 5,015 रुपए एससी-एसटी के छात्र 3,835 रुपए जमा करने के बाद ...

बंगाल चुनाव: राजनैतिक हत्याओं का बंगाल चुनाव से क्या लिंक है!

  अस्पताल के बेड पर प्लास्टर से बंधे पैर के साथ ममता बनर्जी की तस्वीर बंगाल चुनावों को लेकर चल रही तमाम चिंताओं को सही साबित कर रही है। नफ़रत और हिंसा से भरे चुनाव प्रचार और अभूतपूर्व ध्रुवीकरण की आशंका इन चुनावों के साथ जुड़ी हुई है।   यह कहना ग़लत नहीं होगा कि   मौजूदा वक्त में ममता बनर्जी , बीजेपी के खिलाफ खड़ी सबसे मजबूत ताकतों में से एक है और पश्चिम बंगाल बीजेपी का सबसे बड़ा सपना। पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी को केवल 3 सीटें हासिल हो पाईं थीं। लेकिन लोकसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। 42 सीटों में से 18 सीटें हासिल की बीजेपी ने और वोट शेयर के मामले में तृणमूल काग्रेस से केवल 3.05% कम वोट हासिल किए। बीजेपी की कोशिश यही रहेगी कि आगामी विधानसभा चुनावों में पिछले विधानसभा चुनावों के परिणामों की झलक न दिखे जबकि ममता हर कीमत पर लोकसभा चुनावों के परिणामों की झलक को ख़त्म कर देना चाहेंगी।   बंगाल- राजनैतिक समीकरण   पश्चिम बंगाल के 294 सीटों में से 165 सीटें ऐसी हैं जहाँ पर किसी एक तबके का अधिक प्रभाव है। लगभग 55 सीटों पर अल्पसंख्यकों का वर्चस्व ...

Chhattisgarh agrees to adopt Alternative Development Model!

  Chattisgarh govt has signed a strategic partnership with India Center Foundation (ICF). The partnership focuses on the inclusive, sustainable, and progressive development of the state, which is aligned with the principles of the Alternative Development Model (ADM). ADM is a socio-economic development framework that works on the principles of Energy-efficiency, Environmental Responsibility, and Sustainability (EES).   Also read:   मंहगाई से जनता त्रस्त, मोदी सरकार मस्त, सरकार की प्राथमिकताओं में सिर्फ पूंजीपतियों का भला   This ground-breaking model will upgrade the development operating system that supports the non-exploitation of people, resources, and environment at its core to create equitable opportunities through new types of economic entities. Principal Secretary- Industry Shri Manoj Pingua and the Managing Trustee of ICF Shri. Sankalp Shukla signed the MoSA in the presence of state CM Bhupesh Bhagel and Founding Chairman of ICF Shri. Vibhav Kant Upadhyay...

व्यंग्य : मिथुन सच में कोबरा हैं लेकिन किसी को डसेंगे तो वह इंसान कागज का नहीं बनेगा

    इस समय दो तरह के चुनाव चल रहे हैं। पहली तरह वाले में पांच राज्यों के भीतर विधानसभा चुनाव, दूसरी तरह वाले में यूपी में पंचायत चुनाव। दोनो चुनाव में समानता ये है कि बड़ी संख्या में जानवर चुनाव मैदान में उतर आए हैं। जानवर कहने से बुरा मत मानिएगा। असल में जब कोई किसी को शेर कहता है तो उसका सीना फूलकर 56 इंची हो जाता है लेकिन जैसे ही कोई जानवर कह दे तो बुरा मान जाता है। ऐसे थोड़े होता है भइया जी।    जानवरों के राजनीति में प्रवेश करने के बाद पश्चिम बंगाल में   मिथुन चक्रवर्ती कोबरा   के रूप में भाजपा में शामिल हुए हैं। मिथुन ने पीएम के सामने ही मंच पर कहा था कि उन्हें नकली सांप न समझें, वह कोबरा हैं, जिसे डस लेंगे वह इंसान फोटो में बदल जाएगा। हमें मिथुन की बात पर शक हुआ तो उनकी तमाम फिल्में देखी। एक फिल्म सीन मिला। मिथुन के भीतर सच में एक कोबरा है। पैरों के नीचे हाथ ले जाकर हाथों से फन बनाना और फिर उल्टा होकर उड़ना इस बात का प्रूफ है कि   मिथुन पहले से ही कोबरा   थे। जिस तरह से उन्होंने गुंडे की आंख में अपने फन रूपी हाथ से डसा वह इस बात का संकेत है ...